FIR vs NCRB में क्या अंतर है, इसको लेकर लोगों में भारी भ्रम रहता है. इस लेख में आसान desi Hindi में जानिए FIR क्या होती है, NCR क्या है और NCRB
FIR vs NCRB को लेकर भ्रम क्यों होता है
FIR vs NCRB को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि लोग NCR और NCRB को एक ही चीज समझ लेते हैं. थाने में जब पुलिस कहती है कि NCR काट दी गई है, तो आम आदमी सोचता है कि शायद NCRB में केस चला गया. असलियत इससे बिल्कुल अलग है.
Kanpur से लेकर Delhi तक, हर थाने में FIR और NCR का नाम तो सुना जाता है, लेकिन NCRB का काम क्या है, यह बहुत कम लोगों को पता होता है. FIR vs NCRB को समझने के लिए सबसे पहले यह साफ करना जरूरी है कि NCRB कोई शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं है.
FIR क्या होती है और कब दर्ज होती है
FIR का पूरा नाम First Information Report होता है. FIR vs NCRB के फर्क को समझने में FIR सबसे अहम कड़ी है. जब कोई गंभीर अपराध होता है, जैसे चोरी, लूट, मारपीट जिसमें गंभीर चोट हो, रेप, हत्या, धोखाधड़ी या अपहरण, तब FIR दर्ज होती है.
FIR दर्ज होते ही पुलिस को जांच का अधिकार मिल जाता है. पुलिस बिना कोर्ट की अनुमति के आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है. FIR में अपराध की पूरी जानकारी लिखी जाती है, जैसे घटना कब हुई, कहां हुई, किसने की और कैसे की.
How to Write FIR For Police in Hindi 2025
FIR vs NCRB के संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि FIR दर्ज करना पुलिस की जिम्मेदारी है. अगर अपराध संज्ञेय है और पुलिस FIR दर्ज नहीं करती, तो यह कानून का उल्लंघन माना जाता है.
NCR क्या होती है और इसका मतलब क्या है
अब आते हैं उस शब्द पर, जिसे लोग अक्सर NCRB समझ लेते हैं. NCR का मतलब Non Cognizable Report होता है. FIR vs NCRB की बहस में असल टकराव FIR और NCR का है, NCRB का नहीं.
NCR ऐसे मामलों में दर्ज होती है, जो हल्के अपराध की श्रेणी में आते हैं. जैसे गाली-गलौज, हल्की मारपीट जिसमें गंभीर चोट न हो, पड़ोस का झगड़ा, धमकी या छोटी कहासुनी.
NCR दर्ज होने पर पुलिस सीधे जांच शुरू नहीं कर सकती. पुलिस को पहले कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है. कई मामलों में पुलिस दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराने की कोशिश करती है.
FIR vs NCRB में असली अंतर कहां है
अब यहां सबसे जरूरी बात आती है. FIR vs NCRB कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है. सही तुलना FIR vs NCR की होती है. NCRB कोई रिपोर्ट नहीं, बल्कि एक संस्था है.
NCRB का पूरा नाम National Crime Records Bureau है. NCRB देश भर के अपराधों का डेटा इकट्ठा करता है. थानों में दर्ज FIR और NCR से जुड़ा आंकड़ा NCRB के पास जाता है, लेकिन आम आदमी का NCRB से सीधा कोई लेना-देना नहीं होता.
यानि अगर आपकी FIR दर्ज हुई है या NCR लिखी गई है, तो आप NCRB नहीं जाते. FIR vs NCRB का फर्क यही है कि एक जमीन पर दर्ज होने वाली रिपोर्ट है और दूसरा आंकड़ों का राष्ट्रीय रिकॉर्ड रखने वाला विभाग.
पुलिस अक्सर NCR क्यों काट देती है
FIR vs NCRB को समझते समय यह सवाल भी उठता है कि पुलिस FIR की जगह NCR क्यों लिख देती है. इसका जवाब सीधा है. कई बार पुलिस को लगता है कि मामला हल्का है या दोनों पक्षों में समझौते की गुंजाइश है.
कुछ मामलों में पुलिस जानबूझकर FIR से बचती है, ताकि केस का बोझ न बढ़े. ऐसे में पीड़ित को यह जानना जरूरी है कि अगर अपराध संज्ञेय है, तो वह FIR दर्ज कराने पर जोर दे सकता है.
अगर FIR न लिखी जाए तो क्या करें
FIR vs NCRB की जानकारी होने का फायदा यही है कि आप अपने अधिकार समझ पाते हैं. अगर पुलिस FIR दर्ज नहीं करती, तो आप SP ऑफिस, SSP ऑफिस या Magistrate कोर्ट में आवेदन दे सकते हैं.
ऑनलाइन शिकायत और जनसुनवाई पोर्टल भी एक विकल्प है. कई मामलों में कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज होती है.
NCRB का असली काम क्या है
अब आखिरी और सबसे जरूरी बात. FIR vs NCRB में NCRB का काम केवल आंकड़े जुटाना है. NCRB हर साल Crime in India नाम से रिपोर्ट जारी करता है. इसमें बताया जाता है कि किस राज्य में कौन से अपराध कितने हुए.
NCRB न तो आपकी शिकायत सुनता है, न FIR लिखता है, न NCR दर्ज करता है. यह पूरी तरह एक डेटा और रिसर्च से जुड़ी संस्था है.
कानूनी प्रक्रियाएं
FIR vs NCRB को समझना हर आम नागरिक के लिए जरूरी है. FIR और NCR थाने में दर्ज होने वाली कानूनी प्रक्रियाएं हैं, जबकि NCRB एक राष्ट्रीय रिकॉर्ड रखने वाला विभाग है.
अगर आपको यह फर्क समझ में आ गया, तो पुलिस से बात करते वक्त आप ज्यादा सजग रहेंगे. सही जानकारी ही सबसे बड़ी ताकत है, और FIR vs NCRB का यह अंतर जानना उसी ताकत की पहली सीढ़ी है.






